दो मित्रों की कहानी
चंदू और बंधु दोनों चलती हुई रेलगाड़ी में यात्री के जूते पर पॉलिश किया करते थे कभी-कभी जब किसी यात्री से मंजू अनन्य करते हुए कहता जूते ज्यादा मेले हो गए हैं साहब क्या पालिश कर दूं![]() |
| Dosti ki Shyari Hindi Main With Image |
अस्पताल में पड़े पड़े उसे कई दिन और फिर महीने बीत गए अक्सर वह देखता था कि एक लड़का सुबह से उसके पास आकर बैठ जाता अपने साथ एक गिलास में चाय लेकर आता और उसे पिलाता उसे कुछ कुछ याद आया अरे या तो वही पालिश वाला लड़का है
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| Dosti Love Shyari With Image |
मन दुखी आंखों में भर में भरे आंसुओं को देखकर उसे नंदू के सिर पर प्यार से हाथ रखा उसे उठाकर बिठाया और कहा भाई जिंदगी में यह सब होता ही रहता है किसी को क्या पता किसके साथ क्या कब हो जाए हम गरीब जरूर है पर कुछ ना कुछ करके अपनी रोजी-रोटी तो कमा कर रहे हैं
क्या आप सोच सकते हैं अब क्या होगा
पर मैं अब क्या काम करूंगा मन दूर होते हुए कहता है कुछ नहीं बिगड़ा है भाई देख आम दिनों फिर से अपने पालिश का धंधा शुरु करेंगे मैं तुझे किसी डिब्बे में एक जगह बिठाकर तेरे पालिश करने के लिए जूते ले आयाकरूंगा कुछ जूते में फालिस करूंगा और कुछ टू करना दोनों भाई मिलकर पॉलिश करने और गीत गाएंगे पर मेरा तो कोई भी नहीं है मंजू ने फिर से सकते हुए कहा क्यों दोस्त और हां मेरी मां और छोटा भाई भी तेरा साथ है
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| Dosti Story in Hindi |
इस कहानी से मैं क्या शिक्षा मिलती है
इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि हमें किसी को भी असहाय नहीं छोड़ना चाहिए जैसा कि चंदू नंदू को असहाय नहीं छोड़ा इसलिए
हमें किसी को नहीं खोना चाहिए दुनिया में कितने सारे ऐसे बच्चे होंगे जो अनाजों में दिन का कोई नहीं होगा उनके साथ ऐसा हो जाता है उनको भी उनके लिए भी भगवान ने क्लॉक को जरूर भेजता है
शिक्षा: हमें कभी भी किसी को असहाय नहीं छोड़ना नहीं चाहिए।



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